हम सर से ताज हटाने की क्षमता रखते हैं - देवगम

पश्चिमी सिंहभूम किरीबुरू मेघाहतुबुरू सेल कंपनी सरकार व प्रशासन ग्रामीणों के साथ वार्ता के बाद मौन जिला प्रशासन - लागुड़ा  देवगम ने इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि "हम सर से ताज हटाने की क्षमता रखते हैं"

हम सर से ताज हटाने की क्षमता रखते हैं - देवगम

 बलिदानीयों की धरती झारखंड में एक और बगावत की चिंगारी सुलगती नजर आ रही है। 

सारंडा पीढ मानकी  लागुडा देवगम ने कहा  सेल, बीएसएल की स्थानीय बेरोजगारों को नौकरी में उपेक्षा व अन्य गलत नीतियों के खिलाफ सेल की गुवा खदान के कार्यालय का घेराव में शामिल तमाम मजदूर संगठनों, मुंडाओं व अन्य संगठनों के आंदोलन को सारंडा पीढ़ के मानकी लागुडा़ देवगम ने अपना पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि इसी मामले को लेकर मेरे नेतृत्व में सारंडा के दर्जनों गांवों के मुंडाओं, शिक्षित बेरोजगार व ग्रामीणों ने सेल की किरीबुरु, मेघाहातुबुरु एवं गुआ खदान प्रबंधन के खिलाफ अनिश्चित कालिन आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की थी। लेकिन बीते वर्ष जगन्नाथपुर के तत्कालीन एसडीओ शंकर एक्का एवं उपायुक्त अनन्य मित्तल के साथ अलग-अलग दो दौर की त्रिपक्षीय वार्ता के के बाद हम सभी आंदोलन वापस लिये।किंतु दुःख इस बात का है कि उपायुक्त ने वार्ता के डेढ़ माह बाद पुनः समीक्षा बैठक इस मामले में हम ग्रामीणों के साथ करने की बात कही थी लेकिन आज तक कोई बैठक नहीं हुआ और सेल प्रबंधन बहाली समेत तमाम प्रकार की मनमानी करते रहा। उन्होंने कहा कि अब सारंडा के हम ग्रामीणों का जिला प्रशासन व सेल प्रबंधन से भरोसा उठ गया है।

सारंडा के तमाम गांवों के मुंडाओं व शिक्षित बेरोजगारों के साथ जल्द हीं इस मामले को लेकर बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति बनाया जायेगा तथा सेल प्रबंधन के खिलाफ आरपार की लडा़ई लडी़ जायेगी। उन्होंने कहा की क्योकि सारंडा में बहुत सरे देश के सबसे बड़ी लौह अयस्क है लेकिन हमरे शिक्षित बेरोजगारों युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं यह सरकार व प्रशासन सारंडा के तमाम गांवों के शिक्षित बेरोजगारों व हम आदिवासी-मूलवासी के विरोधी है। इसका बडा़ प्रमाण यह है कि सेल की इन खादानों से बहने वाली लाल मिट्टी-मुरुम से बंजर हुई हम ग्रामीणों की सैकड़ों एकड़ रैयत कृषि भूमि का मुआवजा एसडीओ व वन विभाग से जांच कराने के बावजूद आज तक नहीं दिला सकी, जबकि जाँच में जाँच कमिटी ने पाया था कि हम ग्रामीणों का खेत बंजर हुआ है, उन्होंने कहा कि अगर झारखण्ड सरकार चाहे तो हमारे क्षेत्र की सेल समेत तमाम खदानों की तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की बहाली में सारंडा के बेरोजगारों को शत फीसदी नौकरी दिया जाता परंतु इसके बिपरीत स्थानीय बेरोजगारों की उपेक्षा कर बाहरी लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, उन्होंने कहा कि सेल प्रबंधन, झारखण्ड सरकार एवं प्रशासन सारंडा के हम ग्रामीणों के विश्वास व धैर्य की परीक्षा लेने का कार्य नहीं करे, अन्यथा हम विश्वासघात करने वाते सत्ताधीशों के सर से ताज उतारने के लिये सदैव तैयार बैठे हैं, उन्होंने कहा कि अगली बार जब आर्थिक नाकेबंदी की जायेगी तो जब तक परिणाम नहीं मिलता तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा,इस प्रकार उग्र आंदोलन होगा।